रामनवमी के लिए अनुमति नहीं मिलने पर विवाद, छात्रों ने प्रशासन पर लगाए पक्षपात का आरोप

कोलकाता:पश्चिम बंगाल में रामनवमी को लेकर सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है। इलाके में चारो ओर सुरक्षाबलों की तैनाती और हावड़ा की सुरक्षा बढ़ाना इस मामले में राज्य सरकार की सक्रियता को साफ तौर पर दिखा रहा है। इसी बीच कोलकाता स्थित जादवपुर विश्वविद्यालय से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जहां विश्वविद्यालय प्रशासन ने कुलपति के नहीं होने का हवाला देते हुए विश्वविद्यालय परिसर में रामनवमी मनाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। हालांकि प्रशासन के इस कदम के बाद छात्रों में काफी निराशा है।

विश्वविद्यालय के छात्र ने बताया बहाना
रामनवमी के लिए अनुमति नहीं देने पर जादवपुर विश्वविद्यालय (जेयू) के छात्रों में निराशा का माहौल है। साथ ही कई छात्रों ने इसे कॉलेज प्रशासन के द्वारा दिया जा रहा बहाना करार दिया। इन्हीं में से एक छात्र सोमसूर्या बनर्जी ने अपनी नाराजगी व्यक्त की। सोमसूर्या ने बताया कि 28 मार्च को विश्वविद्यालय प्रशासन को रामनवमी समारोह के लिए अनुमति मांगने के लिए एक पत्र सौंपा था। बनर्जी के अनुसार, जब उन्होंने विश्वविद्यालय से अनुमति प्राप्त करने के लिए संपर्क किया, तो उन्हें बताया गया कि कुलपति की अनुपस्थिति के कारण अनुमति नहीं दी जा सकती है। बनर्जी ने इसे एक बहाने के रूप में बताया और आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस स्थिति का फायदा उठा रहा है।

छात्र ने विश्वविद्यालय परिसर पर लगाया आरोप
सोमसूर्या ने यह भी बताया कि 3 और 4 अप्रैल को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) द्वारा विश्वविद्यालय में एक राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, और उस समय भी कुलपति उपस्थित नहीं थे, लेकिन उन्हें अनुमति मिल गई थी। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय में इफ्तार जैसी धार्मिक गतिविधियों का आयोजन हुआ, लेकिन कभी किसी ने इसका विरोध नहीं किया।

छात्रों ने पुलिस को भेजा मेल
इसके साथ ही सोमसूर्या का कहना है कि उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को सूचना दी है और पुलिस को भी एक ई-मेल भेजा है, जिसमें उन्होंने बताया है कि वे रामनवमी को शांतिपूर्वक मनाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि विश्वविद्यालय प्रशासन और सभी छात्र संघ उनके समारोह का सम्मान करेंगे और सहयोग करेंगे। इस पूरे मामले में, बनर्जी का आरोप है कि प्रशासन रामनवमी समारोह के लिए उन्हें अनुमति नहीं दे रहा है, जबकि अन्य धार्मिक और राजनीतिक गतिविधियों के लिए अनुमति दी जाती है।

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