दो साल में खाद्य पदार्थों के 348024 नमूने लिए; 44520 सैंपल फेल, वसूला 107.35 करोड़ जुर्माना

नई दिल्ली: देश में खाद्य पदार्थों में कई तरह की कमियां देखने को मिल रही हैं। नमूनों के विश्लेषण में गैर अनुरूपता, असुरक्षित, घटिया क्वालिटी और लेबलिंग दोष आदि बातें सामने आई हैं। दो वर्ष में खाद्य पदार्थों के 348024 नमूने लिए गए। जब इनकी जांच हुई तो इनमें से 78434 नमूनों में गैर अनुरूपता यानी कमी मिली है। अपालन करने वाले नमूनों में असुरक्षित नमूनों की संख्या 13361 रही है। निम्नस्तीय नमूनों की संख्या 44520 है। लेबलिंग दोष और भ्रामक/विविध नमूने 20553 हैं। दीवानी मामलों में दोषसिद्धि की संख्या 58050 है। वसूला गया जुर्माना 107.35 करोड़ रुपया रहा है। आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि की संख्या 2349 है। वसूला गया जुर्माना 5.42 करोड़ रुपये है। वर्ष 2022-23 में 177511 नमूनों का विश्लेषण किया गया, जबकि 2023-24 में 170513 नमूनों की जांच हुई थी।
लोकसभा सदस्य मालविका देवी ने गुरुवार को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री से पूछा था कि सरकार द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए/उठाए जा रहे कदमों का ब्यौरा क्या है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उद्योगों द्वारा सब्जियों को जैविक तरीके से उगाए जाने को प्रोत्साहित किया और उसका उपयोग किया जाए। दूसरा सवाल पूछा गया कि सरकार द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए/उठाए जा रहे कदमों का ब्यौरा क्या है कि प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में प्रयुक्त चीनी की वास्तवित मात्रा और उत्पाद विशेष में मौजूद चीनी के प्रकार का भी उल्लेख हो।
तीसरा सवाल था कि सरकार द्वारा ऐसी कंपनियों के विरूद्ध उठाए गए कदमों का ब्यौरा क्या है जो बड़ी कंपनियों द्वारा बनाए गए वास्तविक उत्पादों से मिलते जुलते उत्पाद बना रही हैं और उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों व छोटे गांवों में बेच रही हैं। चौथा सवाल पूछा गया कि सरकार द्वारा विगत वर्ष और वर्तमान वर्ष के दौरान इस संबंध में की गई दंडात्मक कार्रवाई का ब्यौरा क्या है और ऐसी कितनी कंपनियों को दंडित किया गया है।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने बताया, सरकार, सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों (पूर्वोत्तर राज्यों को छोड़कर) में परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीआई) के माध्यम से जैविक खेती और सब्जियों सहित सभी कृषि और बागवानी फसलों को बढ़ावा दे रही है। पूर्वोत्तर राज्यों के लिए मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट (एमओवीसीडीएनईआर) योजना लागू की जा रही है। दोनों परियोजनाएं जैविक खेती में संलग्न किसानों को प्रारंभ से लेकर अंत तक अर्थात उत्पादन से लेकर फसलोत्तर प्रबंधन प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण तक सहायता पर बल देती हैं।
पीकेवीवाई और एमओवीसीडीएनईआर योजना का मुख्य फोकस प्राकृतिक संसाधन आधारित एकीकृत और जलवायु अनुकूल संधारणीय खेती प्रणालियों को बढ़ावा देना है, जो मिट्टी की उर्वरता, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण, खेत पर पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण को बनाए रखना और बढ़ाना सुनिश्चित करती है। बाहरी इनपुट पर किसानों की निर्भरता को कम करती है। जैविक उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देने के लिए, जैविक उत्पादों के गुणवत्ता नियंत्रण को सुनिश्चित करने के लिए दो प्रकार की जैविक प्रमाणन प्रणालियां विकसित की गई हैं।