जब परिवार ने नौकरी से रोका तो समाज को आगे बढ़ाया…प्रेरणा देगी देहरादून की रेणु की कहानी

देहरादून: अच्छी परवरिश के साथ बेहतर शिक्षा मिली, लेकिन समाज की रूढ़िवादी सोच के कारण नौकरी करने की अनुमति नहीं मिली। जीवन में कुछ करने का जुनून था, जिससे महिलाओं के उत्थान का प्रयास किया और यही दून निवासी रेणु की पहचान बन गया। उन्होंने शुरुआत में एक एनजीओ खोला और इसके जरिये उन महिलाओं का जीवन सुधारा जो आर्थिक रूप से कमजोर थीं और स्लम एरिया में रहती थीं। आज यह मातृशक्ति पांच एनजीओ खोल चुकी हैं और दो और की तैयारी है। वह इसके जरिये करीब 1000 महिलाओं को बेहतर जीवन के साथ ही रोजगार भी दिला रही हैं।

देहरादून के विद्या विहार निवासी रेणु रौतेला आज एक सफल समाजसेविका हैं, लेकिन यह सफलता हासिल करने के लिए उन्होंने समाज की रूढ़ियों को चुनौती दी और अपने सपनों को पूरा किया। रेणु बताती हैं कि वह पांच भाइयों की अकेली बहन हैं, उन्होंने पीजी तक पढ़ाई की। 22 की उम्र में 1990 में शिशु मंदिर में, बनारस समेत चार जगहों पर नौकरी के लिए चयन हो गया था, लेकिन अकेली लड़की कैसे बाहर रहेगी परिवार की इस रूढ़िवादी सोच ने नौकरी नहीं करने दी। जनवरी 1991 में शादी हुई और कुछ समय बाद जुड़वा बच्चों की जिम्मेदारी आ गई। मगर मन में अपनी पहचान बनाने का जज्बा नहीं गया।

पति वीरेंद्र सिंह रौतेला सेंट जोजफ स्कूल में थे तो उन्होंने पूरा सहयोग किया। शुरुआत में टिफिन सर्विस शुरू की, इससे घर खर्च तो निकलने लगा, पर मन शांत नहीं हुआ। इसके बाद महिलाओं के उत्थान की ठानी और विद्या विहार की और अन्य जगहों से 50 से अधिक महिलाओं को एक साथ जोड़ा और पहला महिला उत्थान सशक्तीकरण ट्रस्ट (एनजीओ) वर्ष 9 सितंबर 2021 में खोल दिया। 23 सितंबर को इसे रजिस्टर करवा लिया। तब से लेकर अब तक उनकी ट्रस्ट की पांच शाखाएं खोल दीं। हरिद्वार और दूधली में खोलने की तैयारी है।

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